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कैसे कालसर्प योग को अधिक बल मिलता है ?

कालसर्प योग के साथ साथ कुण्डली में अन्य योग, अन्य ग्रह स्थितियां होती है जिनसे उनको बल मिलता है, जिसके कारण कालसर्प योग का उपाय करने पर भी लाभ नही मिलता। #मंगल - यदि कुंडली मे मंगल राहु या केतु के संपर्क में आता है तो यह योग अधिक शक्तिशाली हो जाता है। #शुक्र - अगर कुण्डली में शुक्र की स्थिति अच्छी नही है और वह राहु या केतु के संपर्क में आ जाता है तो यह बहुत तरह से दिक्कते और बढ़ा देता है। #सूर्य - सूर्य यदि इस योग राहु केतु से संबंधित होता है तो फिर जीवन में दिक्कतें बहुत बढ़ जाती है और कुछ ऐसी दिक्कत होगी जो लगभग जीवनभर रहती ही है। #चंद्रमा - यदि यह इस योग में राहु केतु से संबंधित होता है तो परिवार, रिश्तेदारी, निकट मित्रो से संबंधित कोई परेशानियां हमारे जीवन मे अवश्य रहती है। इसी प्रकार कई तरह के प्रभाव देखने मे आते है, जिन्हें कुण्डली का अध्ययन करके जाना जा सकता है। कुण्डली में कालसर्प योग को बुरा माना जाता है। इसका मुख्य कारण निम्न लिखित है कालसर्प योग यदि बलवान है तो वह सूर्य मंगल एवं सूर्य बुध की युतियों से बनने वाले योग का प्रभाव कम कर देता है। इसी तरह चंद्रमा मंगल और चंद्रमा शुक्र की युति के प्रभाव को कम कर देता है। कालसर्प योग के नाम से अधिक इसलिए परेशानी होती है, क्योंकि राहु केतु कुंडली में ऐसे ग्रह है, जो व्यक्ति को आसमान से जमीन और जमीन से आसमान तक पहुंचाने में सक्षम है। जिनकी कुंडली में राहु केतु बलवान हो और सकारात्मक प्रभाव देते हो, ऐसे लोगों को आगे बढ़ने में दिक्कतें नहीं होती। जबकि जिनकी कुंडली में राहु केतु बुरी स्थिति में हो, नकारात्मक प्रभाव देते हो, ऐसे लोगों को दिक्कतें तो होती ही है। साथ ही वह जीवन में बहुत आगे नहीं बढ़ पाते। राहु केतु से बनने वाले योग ज्यादातर कुंडली में अन्य ग्रहों के सहयोग के बिना नहीं बन सकते। अन्य ग्रहों का सहयोग राहु केतु को किस प्रकार मिल रहा है, यह सब पर निर्भर है कि राहु केतु किस प्रकार के प्रभाव देंगे। If you are interested in writing articles related to astrology then do register at – https://astrolok.in/my-profile/register/ or contact at astrolok.vedic@gmail.com

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