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"ज्योतिष" - एक परिचय

नमस्कार, जय माता जी मैं सचिन कुमार आपके सामने अपने गुरुओ की कृपा से वैदिक ज्योतिष पर थोड़ी चर्चा करना चाहूँगा | कई आदरणीय ज्योतिष शास्त्री फलादेश करके ज्योतिष शास्त्र का प्रचार प्रसार कर रहे है मुझे भी इस पवित्र और विशाल शास्त्र पर गुरु कृपा से थोड़ा प्रकाश डालने का प्रयास करूँगा कि आखिर ज्योतिष शास्त्र है क्या और इसका उद्भव कब हुआ | ज्योतिष शास्त्र यह शब्द सामने आते ही हमारे मन मे कई प्रकार की जिज्ञासा स्थान लेने लगती है, जैसे क्या ज्योतिष के माध्यम से भविष्य मे होने वाली घटनाओं का पता चल सकता है? क्या ज्योतिष उपाए द्वारा हम हमारा भाग्य बदल सकते है? वगैरा वगैरा.... इन सभी जिज्ञासाओ को परे करके हमे पहले यह जानना चाहिए कि आखिर ज्योतिष शास्त्र है क्या? ज्योतिष एक वेदांग है अर्थात वैदो का अंग है | ज्योतिष के बारे मे यजुर्वेद मे एक श्लोक आता है "यथा शिखा मयूराणा, नागानां मणियों यथा| तद्वद्वेंदांग स्त्राणां ज्योतिषं मूर्धानि स्थितम् ||" अर्थात जैसे मोरों मे शिखा है, नागों मे मणि इसी प्रकार वेदांग शास्त्रों मे ज्योतिष चोटी पर है | वेद हमारी प्राचीन धरोहर है | वैदों मे सम्पूर्ण ज्ञान का सार समाया हुआ है | ज्योतिष भी वैदों की ही एक शाखा है, वैदों का ही अंग है इसे वैदों के नेत्र माना जाता है | वैदो का उद्भव कब हुआ पता लगाना असंभव है और ज्योतिष इसका अंग है इसलिए ज्योतिष शास्त्र का उद्भव कब हुआ यह पता लगाना लगभग असंभव है, परंतु हमारे पौराणिक काल में ऋषियों ने अथक प्रयास और तपस्या के द्वारा यह अनमोल शास्त्र हम तक काफी हद तक विकसित होके पहुंचा है | आइए अब हम ज्योतिष शास्त्र को परिभाषित करते है | पुराणों मे ज्योतिष के बारे मे कहा गया है "सूर्यादी ज्योतिषां ग्रहणां बोधक शास्त्रम" अर्थात वह ज्ञान जो ग्रहो की स्थिति एवं उनके भ्रमण और काल एवं उनका हम सब पर पड़ने वाले प्रभाव को बताता है | उसे ज्योतिष शास्त्र केहते हैं | यह तो हुई ज्योतिष की परिभाषा हमारी सीधी भाषा मे अब यह जानते है कि ज्योतिष किस आधार पर कार्य करता है इसकी तार्किकता क्या है | प्रत्येक मनुष्‍य अपने कर्मो के अधीन रहता है |उसे कर्म अवश्य करना पड़ता है और यही जीवन है | अब प्रत्येक कर्म का प्रतिफल होता है | यह सर्वभोमिक सिद्धांत है |वैदिक विचारधारा कर्म और उसका प्रतिफल एक साथ काम नहीं करते जैसे कि हम स्थूल रूप से देखते है | किसी भी कर्म का प्रतिफल सोया रेह सकता है और बाद मे कभी भी उभर के सामने आ सकता है, यह एक सुविचारित तथ्य है |कर्म और कर्म फल का यही लचीला सिद्धांत ही ज्योतिष का सार है | ज्योतिष शास्त्र मे कर्म बहुत महेत्व रखते है | क्योंकि पिछले जन्मों मे किए गए कर्म और उनके प्रतिफल के आधार पर ही इस जन्म मे प्रारब्ध बनता है जो ज्योतिष शास्त्र द्वारा प्रकाशमान होता है | इसीलिए इसे वेदांग केहते है |सीधे तौर पर कहे तो हमारे द्वारा किए गए कर्मो के प्रतिफल को जानने मे जो शास्त्र हमारी मदद करता है वह ज्योतिष शास्त्र है | ज्योतिष शास्त्र एक ऐसा विषय है जिसे जानना बहुत कठिन है | और अगर इस पर चर्चा की जाए तो जितना समय लिया जाए सब कम है इसीलिए तो इसे सामुद्रिक शास्त्र भी कहा गया है क्योंकि यह समुद्र के जैसे गहरा है | पौराणिक काल मे कई ऋषियों ने अपने अथक प्रयास और सहयोग से वैदों के साथ ही ज्योतिष का भी विकास और प्रचार किया हैं जिससे यह शास्त्र हम तक पहुँचा है | मैंने भी ऋषि समान मेरे गुरुओ के अथक प्रयासों से यह ज्ञान प्राप्त किया और इस विषय पर कुछ प्रकाश डालने का प्रयास किया है | आशा करता हूँ आपको मेरा यह प्रयास पसंद आया होगा और ज्योतिष शास्त्र अखिरकार क्या है उस पर थोड़ा बोध हुआ होगा | मेरा लेख पड़ने के लिए धन्यवाद सचिन कुमार हलवदिया 🙏 If you are interested in writing articles related to astrology then do register at – https://astrolok.in/my-profile/register/ or contact at astrolok.vedic@gmail.com

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