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जानिए कुंडली में राहू के कारण बनने वाले 21 शुभ अशुभ योग

यदि राहू के साथ शनि और सूर्य का प्रभाव भी सप्तम भाव से संबंधित घटकों पर हो अशुभ फलों में और तीव्रता आ जाती है।
यदि किसी कुंडली में राहू , शनि की युति हो तो शनि का प्रभाव दुगना हो जाता है।
ये हैं कुछ विशेष प्रभावी योग---
१. यदि मेष, वृषभ, या कर्क राशि का राहू तीसरे, षष्ठ अथवा एकादश भाव मे होतो, यह राहू अनेक अशुभ फलों का नाश कर देता है।
२. यदि राहू केंद्र , त्रिकोण १, ४, ७, १०, ५, ९ वे भाव में हो और केन्द्रेश या त्रिकोणेश से सम्बन्ध रखता हो तो यह राज योग प्रदान कर देता है।
३. यदि १० वे भाव में राहू होतो, यह राहू नेतृत्व शक्ति प्रदान करता है।
४. यदि सूर्य, चन्द्र के साथ राहू होतो, यह राहू इनकी शक्ति को कम करता है।
६. पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जिस जातिका के पंचम भाव में राहू होता है , उस जातिका का मासिक धर्म अनियमित होता है, जिस कारण से जातिका को संतान होने में परेशानी हो सकती है।
७. यदि पंचम भाव में कर्क, वृश्चिक अथवा मीन राशि हो और उसमे राहू, शुक्र की युति होतो, वह जातिका प्रेम जाल में फंस जाती है।
८. य़दि पंचम भाव में राहू, शुक्र की युति हो तो, वह जातिका यौन रोग , अथवा प्रसव सम्बंधित रोगों से ग्रसित होती है।
९. यदि अष्टम भाव में मेष, कर्क, वृश्चिक, या मीन राशि हो और उसमे राहू स्थित होतो, जातिका की शल्य क्रिया अवश्य होती है।
१०. सप्तम भाव में राहू, शनि, तथा मंगल की युति होतो, दाम्पत्य जीवन कष्टमय होता है।
११. यदि ८ वे भाव में शनि, राहू, व मंगल होतो, उस जातिका/ जातक के ८०%तलाक की संभावना होती है। अथवा जीवन भर वैचारिक मतभेद रहते है।
 १२. यदि मेष, या वृश्चिक राशि में ८ वे भाव में या २ रे भाव में राहू पाप ग्रह से युत अथवा दृष्ट होतो, जातिका का दाम्पत्य जीवन कष्टमय होता है।
१३.ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि यदि पंचम भाव में राहू मेष या वृश्चिक राशि का हो अथवा मंगल की दृष्टि हो तो , उस जातिका की संतान की हानि होती है।
१४. यदि राहू , गुरू की युति होतो, जातिका का एक बार गर्भपात होता है।
१५. सप्तम भाव में स्थित राहू दाम्पत्य जीवन को कष्टमय कर देता है।
१६. यदि २ रे भाव में धनु राशि का राहू होतो, जातिका धनवान हो जाती है।
१७. एकादश भाव में राहू , शुक्र की युति हो तो जातिका का दाम्पत्य जीवन बहुत दुःखी होता है।
१८. यदि शुक्र अथवा गुरू पर राहू की दृष्टि होतो, जातिका अंतर्जातीय एवं प्रेम विवाह करती है।
१९. यदि २ रे या पंचम भाव में राहू होतो , उस जातिका का विवाह बहुत कठिनाई से होता है।
२० यदि ८ वे भाव या ११ वे भाव में राहू होतो, उस जातिका का विवाह तो हो जाता है , किन्तु दाम्पत्य जीवन कष्टप्रद होता है। अथवा अलगाव/तलाक की आशंका अधिक होती है।
२१. राहू की दृष्टि सप्तम भाव , सप्तमेश, मंगल, व शुक्र पर होतो, ऐसी जातिका अंतर्जातीय विवाह करती है।
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