• +(91) 7000106621
  • astrolok.vedic@gmail.com

Learn what’s best for you

Learn Jyotish
horoscopes

जानिए अहंकार के ज्योतिषीय कारण ओर निवारण के उपायों को ...



प्रिय मित्रों/पाठकों, किसी भी जातक की जन्म कुंडली में ग्रहों की बनती-बिगड़ती स्थिति इंसान को अहंकारी बनाती है तो आइए हम आपको बताते हैं कि कौन से ग्रह आपको अहंकारी बनाते हैं और अहंकार से कैसे बिगड़ सकता है आपका भाग्य। ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाये तो क्रोध के मुख्य कारण मंगल, सूर्य, शनि, राहु तथा चंद्रमा होते हैं। सूर्य सहनशक्ति है तो मंगल अक्रामक और चंद्रमा शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों का प्रतीक। जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्रमा, मंगल ग्रह एक-दूसरे के साथ किसी रूप में सम्बद्ध है तो व्यक्ति के अन्दर क्रोध अधिक रहता है।
इसके अलावा मंगल शनि की युति क्रोध को जिद के रूप बदल देती है। राहु के लग्न, तीसरे अथवा द्वादश स्थान में होने पर काल्पनिक अहंकार के कारण अपने आप को बडा मानकर अंहकारी बनाता है जिससे क्रोध उत्पन्न हो सकता है।

जनिए कौन से ग्रह बनाते हैं अहंकारी--

अहंकार मन से जुड़ी हुई भावना है. मन से आगे बढ़कर ये व्यवहार तक पहुंच जाता है. हर ग्रह अलग तरह का अहंकार पैदा करता है. अहंकारी बनाने में सबसे बड़ी भूमिका बृहस्पति और चन्द्रमा की होती है। बृहस्पति व्यक्ति को परम अहंकारी बनाता है. दूसरे ग्रहों के साथ मिलकर बृहस्पति अलग तरह का अहंकार पैदा करता है. अलग-अलग अहंकार से अलग समस्या भी पैदा होती है।

कैसे जातक होते है झगड़ालू प्रवृत्ति--

वे सभी जातक जिनकी कुंडली मे मंगल राहु और शनि ज्यादा प्रभावित होते है वो लोग अधिक झगड़ालू प्रवृत्ति के होते है। यदि मंगल के साथ राहु होगा तो ज्यादा झगड़ा करते है, कयोंकि राहु शरीर मे गर्मी बढ़ाता है । यदि कुंडली में शनि कमजोर होगा तो भी झगड़े बहुत होते है। यदि चंद्रमा लग्न में या तीसरे स्थान में मंगल, शनि या केतु के साथ युत हो तो क्रोध के साथ चिडचिडापन देता है। वहीं यदि सूर्य मंगल के साथ योग बनाये तो अहंकार के साथ क्रोध का भाव आता है।

क्रोध का प्रभाव भी घटता-बढ़ता है--

सामान्य तौर पर एक छोटा सा वाकया भी, दीर्घ समय तक क्रोध को जीवित रख सकता है। मंगल ग्रह का शनि से युति गुस्से को नियंत्रित करने में असमर्थ होती है। यह अत्यधिक विघटन का भाव पैदा कर सकते हैं। जिन व्यक्तियों का मंगल अच्छा नहीं होता है, उनमें क्रोध और आवेश की अधिकता रहती है। ऐसे व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी उबल पड़ते हैं। अन्य व्यक्तियों द्वारा समझाने का प्रयास भी क्रोध के आगे बेकार हो जाता है। क्रोध और आवेश के कारण ऐसे लोगों का खून एकदम गर्म हो जाता है। लहू की गति (रक्तचाप) के अनुसार क्रोध का प्रभाव भी घटता-बढ़ता रहता है।

जानिए कैसे क्रोध, अग्नि तत्व का द्योतक है--

राहू के कारण जातक अपने आर्थिक वादे पूर्ण नहीं कर पाता है। इस कारण भी वह तनाव और मानसिक संत्रास का शिकार हो जाता है।

लग्नेष, तृतीयेष एवं सप्तमेष एक दूसरे से 6, 8 या 12 भाव में हो तो परस्पर शत्रु भाव से रिष्तो में कटुता आती है तथा जीवन बाधित होता है। 

6, 8 या 12 भाव के स्वामी होकर तृतीय या सप्तम भाव से संबंध स्थापित होने पर सुख में बाधा का कारण बनता है।

 इसके अलावा लग्नेष, तृृतीयेष या सप्तमेष का निर्बल होकर क्रूर स्थान या क्रूर ग्रहों के साथ होना भी मित्रवत् तथा मधुर रिष्तों में दुख तथा कष्ट का कारण बनता है। 

द्वितीय, पंचम, सप्तम, अष्टम या द्वादष भाव पर क्रूर ग्रह का होना भी मधुरता को कम करने का कारण बनता है। 

क्रोध अग्नि तत्व का द्योतक है। अग्नि तत्व के साथ संबंधित ग्रहों और राशियों के नकारात्मक या विपरीत होने से संबंधित व्यक्ति प्रतिकूल ग्रहों की अवधि के दौरान, अत्यधिक क्रोध करता है।
मंगल के साथ नीच चंद्रमा घरेलू शांति के लिए शुभ नहीं होता है। दूसरे, तीसरे और छठे भाव के स्वामी अगर मंगल व शनि के साथ बैठे है तो जातक के क्रोधी स्वभाव के कारण कैरियर में गंभीर समस्याओं का सामना कराता है।

जानिए सूर्य और अहंकार का ज्योतिषीय संबंध--

पुश्तैनी जायजाद, दौलत और शोहरत अक्सर इंसान के दिमाग पर हावी हो जाते हैं. अहंकार उसी का नतीजा है. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो कुंडली में सूर्य अगर मजबूत हो तो वह भी बना सकता है आपको अहंकारी.
- सूर्य वैभवशाली परंपरा और खानदान का अहंकार पैदा करता है
- कुंडली में सूर्य के ज्यादा मजबूत होने से ये अहंकार पैदा होता है
- आमतौर पर मेष, सिंह और धनु राशि वालों को ये अहंकार ज्यादा होता है
- सूर्य से मिला अहंकार संतान से जुड़ी समस्या देता है

जानिए चन्द्रमा और अहंकार का ज्योतिषीय सम्बन्ध --

हर इंसान के पास कोई न कोई गुण ज़रूर होता है, लेकिन किसी –किसी के पास कोई खास हुनर होता है जिसकी वजह से समाज में उन्हें विशेष मान-सम्मान मिलता है. लेकिन ज्योतिष कहता है कि ऐसे इंसान का चंद्रमा मज़बूत हो तो वो अहंकारी बन सकता है. 
- चन्द्रमा गुणों का अहंकार पैदा करता है 
- इसके अलावा चंद्रमा विशेष श्रेणी का अहंकार भी पैदा करता है 
- कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों को ये अहंकार ज्यादा होता है 
- ये अहंकार अक्सर किस्मत को बिल्कुल उल्टा कर देता है

जानिए मंगल और अहंकार का ज्योतिषीय संबंध--

जो अपने अहंकार पर जीत हासिल कर लेते हैं उन्हें ही मिलती है जिंदगी के हर पहलू में जीत. लेकिन ज्योतिष के जानकारों की मानें तो जिनकी कुंडली में मंगल मज़बूत होता है, उनमें ताकत को लेकर अहंकार बढ़ने लगता है और यह उनकी तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट बन सकता है. 
- मंगल शक्ति का अहंकार पैदा करता है 
- इस तरह के अहंकार में इंसान अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने लगता है 
- वृष, सिंह, वृश्चिक और कुम्भ राशि में ये अहंकार ज्यादा होता है 
- ये अहंकार रिश्तों से जुड़ी समस्याएं देता है

बुध और अहंकार का ज्योतिषीय सम्बन्ध--

अगर आपमें कुछ विशेष योग्यता है या आपकी बुद्धि तेज है तो सावधान हो जाएं क्योंकि आपके ये गुण आपको अहंकारी बना सकते हैं. आपकी कुंडली का बुध आपको अहंकार की ओर ले जा सकता है.
- बुध योग्यता और बुद्धि का अहंकार देता है
- ऐसे लोग अपनी बुद्धि के सामने किसी को कुछ नहीं समझते
- मिथुन, कन्या और मकर राशि में यह अहंकार ज्यादा होता है 
- ये अहंकार धन के बड़े नुकसान का कारण बनता है

बृहस्पति और अहंकार का ज्योतिषीय सम्बन्ध --

जिनके पास पारिवारिक संपन्नता, ऊंची हैसियत और अपार ज्ञान हो, उन्हें अहंकार से सावधान रहना चाहिए. अहंकार के कारण ये सब कुछ नष्ट हो सकता है.
- बृहस्पति ज्ञान और पारिवारिक हैसियत का अहंकार देता है
- इस अहंकार की वजह से लोग अपनी वाणी पर नियंत्रण खो देते हैं 
- ऐसे लोग अक्सर दूसरों को अपने ज्ञान से परेशान करते हैं 
- वृष, कन्या, धनु, मकर और मीन राशि में यह अहंकार ज्यादा होता है 
- ये अहंकार अक्सर अपयश का कारण बनता है

शुक्र और अहंकार का ज्योतिषीय सम्बन्ध --

खूबसूरती सबको आकर्षित करती है. उस पर शान-ओ-शौकत की जिंदगी मिल जाए तो जिंदगी और भी रंगीन नज़र आने लगती है लेकिन इन्हीं रंगीनियों के बीच कब इंसान अहंकार के काले साये में समा जाता है उसे खुद भी पता नहीं चलता. शुक्र मज़बूत हो तो कैसे बढ़ता है अहंकार, जानें 
- शुक्र रूप-सौंदर्य और शान-ओ-शौकत का अहंकार देता है 
- इस अहंकार के कारण लोग अक्सर मूर्ख बनते हैं और पैसे बर्बाद करते हैं 
- मिथुन, तुला और कुम्भ राशि में यह अहंकार ज्यादा होता है 
- इस अहंकार की वजह से अचानक पैसों का बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है

जानिए शनि और अहंकार का ज्योतिषीय सम्बन्ध --

काम हर इंसान करता है लेकिन कुछ लोगों को अपने काम करने की क्षमता और हुनर पर गुमान होने लगता है. ये होता है कुंडली के शनि के मज़बूत होने के कारण. आइए जानते हैं, शनि कैसे बना सकता है आपको अहंकारी.
- शनि काम करने की योग्यता का अहंकार देता है 
- ये लोग किसी और के काम को अपने काम और मेहनत के सामने कुछ नहीं समझते 
- वृष, सिंह, कन्या और मकर राशि वालों को ये अहंकार ज्यादा होता है
- ये अहंकार करियर में उतार-चढ़ाव की वजह बनता है

जानिए कैसे बचें अहंकार से?

--चांदी के गिलास में जल व दूध का सेंवन करें।
--11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
--गणेश स्त्रोत का नियमित पाठ करें।
-- रोज सुबह उठकर अपने बड़ों के चरण स्पर्श करें।
-- रोज सुबह सूर्य को जल अर्पित करें।
-- सूर्य के सामने गायत्री मंत्र का जाप करें।
--अगर आप मांगलिक है तो चण्डिका स्त्रोत का पाठ अवश्य करें।
--अनुलोम-विलोम व भ्रामरी प्रणायाम करें।
--क्रोधी बच्चों को गले में अर्द्ध चन्द्र बनाकर पहनायें।
-- पन्ना और पुखराज कतई न पहनें।
-- हफ्ते में एक बार अन्न और वस्त्र का दान करें।

अहंकार (क्रोध) शान्ति हेतु  विधि पूर्वक नकुल मंत्र का जाप कराना चाहिए या स्वयं करना चाहिए--

 जिस प्रकार नकुल ने अहि का विच्छेद करके सत्य का रूप धारण किया था उसी प्रकार आप अपने जीवन में मधुरता की कामना से नकुल मंत्र का जाप करें या करवाएं।

 -‘‘ यथा नकुलो विच्छिद्य संदधात्यहिं पुनः। एवं कामस्य विच्छिन्नं स धेहि वो यादितिः।। 

का जाप दुर्गादेवी के षोडषोपचार पूजन के उपरांत विधिवत् संकल्प लेकर इस मंत्र का जाप करने से रिश्तों की समस्त विषमाताएॅ समाप्त होकर जीवन में सुख प्राप्त होता है।

किसी ने बिल्कुल सटीक कहा है कि अपने भीतर से अहंकार को निकालकर खुद को हल्का कीजिए क्योंकि ऊंचा वही उठता है जो हल्का होता है. अगर आप अपनी खूबियों और तरक्की को ताउम्र बरकरार रखना चाहते हैं तो अहंकार से दूर ही रहिए। अपनी तरक्की और सुख के लिए ईश्वर को धन्यवाद करते रहें. अहंकार के राक्षस से बचने का यही सबसे कारगर रास्ता है।
अहंकार का नाश होने पर ही विनम्रता की भावना पैदा होने लगती है। अंदर की असीम, अक्षय शक्ति को जागृत करने वाली विनम्रता हृदय में ज्ञान की ज्योति जलाया करती है। ज्ञान ज्योति जलने से अंतरतम के अंधकार में रहने वाले सभी मानसिक रोग भाग जाते हैं। विनम्रता हमारे हृदय में प्रार्थना और भक्ति का द्वार खोलती है। भक्ति के जरिए हम प्रायश्चित करके हृदय को पवित्र कर सकते हैं। मन से उत्पन्न होने वाली अतृप्त कामनाओं का नाश भक्ति से ही होता है। सभी पापों का नाश करने वाली भक्ति हमारे अंदर ईश्वर के विराट रूप का दर्शन करवाती है। जब हम विनम्रता की थाली में, क्षमा की आरती, प्रेम का घृत, दृढ़ विश्वास का नैवैद्य भगवान को समर्पित करते हैं, तब प्रायश्चित की आरती जलने पर इसकी लौ में 'मैं' रूपी अहंकार का राक्षस जलकर भस्म हो जाता है।

Astrolok is one of the best astrology institute where you can learn vedic astrology, marriage astrology, nadi astrology, horoscope matching through live vedic astrology classes. It is a free platform to write astrology articles. Become a part of it by registering at 
https://astrolok.in/my-profile/register/

comments

Leave a reply