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जानिए सोने से पहले बिस्तर को अच्छी तरह से क्यों साफ कर लेना चाहिए..


 शयन/निद्रा/सोना सिर्फ आपके आराम के लिए और शरीर की थकान मिटाने के लिए नहीं है। शास्त्रों में शयन को योग क्रिया कहा गया है जो व्यक्ति के मस्तिष्क और बौद्धिक क्षमता को प्रभावित करता है। इससे आपकी आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है। जो व्यक्ति धन और देवी लक्ष्मी की कृपा चाहते हैं उन्हें सोने से पहले बिस्तर को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए। बेहतर तरीका यह है कि सोने से पहले बिछावन पर साफ चादर बिछा लें। गंदे और अपवित्र स्थान पर शयन करने से नकारात्मक उर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। रात को जिस बिस्तर पर आप सोते हैं उस पर नई बैडशीट बिछा कर सोएं सारे दिन की बिछी बैडशीट पर न सोएं क्योंकि उस पर नकारात्मक ऊर्जा अपना वास बना लेती है और दिन भर की धूल और मिट्टी से नींद में भी विध्न पड़ता है। इससे मन में नकारात्मक विचार आते हैं, शरीर में उर्जा की कमी महसूस होती है।

घर का ईशान कोण साफ और स्वच्छ रखें। 
यहां भगवान लक्ष्मी-नारायण का चित्र अथवा स्वरूप स्थापित कर सकते हैं। इससे आर्थिक उन्नति होती है। 

आर्थिक परेशानी निवारण हेतु यह उपाय शनिवार या मंगलवार के दिन करना चाहिए। इनमें किसी भी दिन सुबह स्नान के बाद किसी शनि या हनुमान मंदिर से पीपल के 11 पत्ते तोड़कर घर लाएं। पत्ता कहीं से भी टूटा या खराब नहीं होना चाहिए। अब इन पत्तों को गंगाजल से अच्छी प्रकार साफ करें। सभी पत्तों पर अनामिका अंगुली से लाल चंदन का प्रयोग करते हुए 'राम' नाम लिखें। फिर इन पत्तों की माला बना लें। घर के पूजाघर में हनुमान जी के सामने इस माला को रखकर हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद 108 बार 'राम' नाम का जाप करें। पूजा समाप्त होने के बाद किसी हनुमान मंदिर में जाकर उन्हें सिंदूर तथा चमेली का फूल अर्पित करते हुए इस माला को उन्हें पहनाएं। ऐसा लगातार 7 मंगलवार करने से विशेष रूप से आपकी धन संबंधी समस्या बहुत जल्दी दूर होगी और आर्थिक संपन्नता आएगी है।

रात को कमरे में अंधेरा करके न सोएं हल्की रोशनी अवश्य रखें

 अपने रसोईघर (किचन) में कोई भी दवा न रखें इससे रोग समाप्त नहीं होता अथवा आए दिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं। रात को जल्दी सोना चाहिए और सवेरे जल्दी उठना चाहिए। सुबह देर तक सोने से शरीर में रोग और शोक अपना बसेरा बना लेते हैं। जहां रोग और शोक होगा । वहां लक्ष्मी का बसेरा नहीं हो सकता। रात को कमरे में अंधेरा करके न सोएं हल्की रोशनी अवश्य रखें। इससे सकारात्मकता बनी रहती है। 
वॉशरुम और शौचालय के दरवाजों को बंद रखें।
पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की यदि आप 7 शनिवार तक लगातार शाम में किसी मंदिर स्थल पर या किसी भी पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल से मिट्टी का दीया जलाते हैं तो आर्थिक समस्या से छुटकारा मिल सकता है। 
जिस स्थान पर घर का कीमती सामान रखें वहां प्रतिदिन सफाई करें। उस स्थान पर गंदगी जमा रहेगी तो धन की हानि होगी। 

ज्योतिष की दृष्टि से ह्रदय रोग को प्रभावित करने वाले कारण-- 
 
कुंडली में चतुर्थ स्थान ह्रदय का स्थान है । 
पंचम भाव /पंचमेश  मनोस्थति को दर्शाता है । 
छठा भाव रोग का कारक है । 
सूर्य ऊर्जा का प्रतीक है । 
बुद्ध स्नायु - मंडल  पर प्रभाव रखता है । 
चन्द्रमा रक्त और मन का प्रतीक है । 
मंगल रक्ताणु और रक्त-परिभ्रमण पर प्रभाव रखता है । 
 
ह्रदय रोग सम्बन्धी योग के कारण--
 
कुंडली में पंचम भाव में पाप ग्रह बैठा हो और पंचम भाव पाप ग्रहों से घिरा हुआ हो । 
पंचम भाव का स्वामी पाप ग्रह के साथ बैठा हो अथवा पाप गृह से देखा जाता है । 
पंचम भाव का स्वामी नीच राशि अथवा शत्रु राशि में स्थित हो या  अष्ठम  भाव में बैठा हो ।
यदि पंचमेश बारहवे घर में हो या बारहवे भाव के स्वामी के साथ 6 /8 /12  स्थान पर हो तो ह्रदय रोग होता है ।  
सूर्य छठे भाव का स्वामी हो कर चतुर्थ भाव में पाप ग्रहों के साथ बैठा हो । 
चतुर्थ भाव में मंगल के साथ शनि  या गुरु स्थित हो और पाप ग्रहों द्वारा दृष्ट हो । 
सूर्य और शनि चतुर्थ भाव में साथ बैठे हों । 
सूर्य कुम्भ राशि में बैठा हो । 
सूर्य वृश्चिक राशि में बैठा हो और पाप ग्रहों से प्रभावित हो । 
सूर्य, मंगल ,गुरु चतुर्थ स्थान पर स्थित हो । 
चतुर्थ स्थान  में शनि हो तथा सूर्य एवं छठे भाव के स्वामी पाप ग्रहों के साथ हो । 
चतुर्थ भाव में केतु और मंगल स्थित हों ।
यदि शनि , मंगल और  वृहस्पति चतुर्थ भाव में हो तो जातक ह्रदय रोगी होता है ।
यदि तृतीयेश , राहु या केतु के साथ हो जातक ह्रदय रोग के कारण  मूर्च्छा में जाता रहता है । 
 
ह्रदय-शूल होने के कारण--
 
चतुर्थ भाव,चतुर्थ भाव के स्वामी और सूर्य की स्थिति से ह्रदय शूल का ज्ञान होता है । 
चतुर्थ भाव में राहु स्थित हो और लग्नेश निर्बल और पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो । 
द्वादश भाव में राहु हो तो गैस वायु से ह्रदय प्रदेश में दर्द होता है । 
पाप ग्रहों के साथ सूर्य वृश्चिक राशि में हों ।
यदि पंचमेश और सप्तमेश छठे स्थान पर हो तथा पंचम अथवा सप्तम स्थान पर पाप ग्रहों की दृष्टि पड़ती हो तो जातक ह्रदय-शूल से पीड़ित होता है । 
 
 ह्रदय कम्पन 
 
घबराहट और बेचैनी से ह्रदय कम्पन होता है ।  जब गुरु या शनि षष्ठेश होकर चतुर्थ स्थान पर बैठें  हों  और पाप ग्रहों के प्रभाव में हो तो यह रोग होता  है । 

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