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जानिए 2019 में कब और कैसा रहेगा ग्रहों का प्रभाव।

प्रिय मित्रों/पाठकों, नए वर्ष 2019 के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गयी हैं। नववर्ष 2019 को लेकर हर किसी के मन में ढेर सारी आशाएं और सपने हैं। नया  साल कैसा रहेगा हम सब के लिए। उनके जीवन में बेहतरी आएगी कि नहीं?

पंचागों के हवाले से बताया कि वर्ष 2019 व हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से विक्रम संवत 2076 (परिधावी संवत्सर) के राजा शनि हैं जबकि मंत्री सूर्य। दुर्गेश भी शनि हैं जबकि धनेश मंगल हैं। 

मंगल का विशेष संयोग बना है 2019 में --

वर्ष2019 में मंगलवार का विशेष संयोग बन रहा है। नए वर्ष की शुरुआत मंगलवार से हो रही है। वहीं नए वर्ष का समापन भी मंगलवार को होगा।

जैमिनी और केदार योग में होगा नए वर्ष 2019 का आगमन--

नव वर्ष की शुरुआत जैमिनी और केदार योग में हो रही है। शुक्र व चंद्रमा  के एक साथ रहने से जैमिनी योग बना है जबकि सभीग्रहों का चार स्थानों पर रहने से केदार योग का संयोग बन रहा है। 

नए वर्ष 2019 में कई ग्रह होंगे वक्री और मार्गी --

ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार नए साल में  गुरु 10 अप्रैल को वक्री होंगे और  मार्गी होंगे 11 अगस्त  को। इसी तरह शनि 30 अप्रैल  को वक्री और मार्गी होंगे 18 सितंबर को l बुध 5 मार्च  को वक्री होंगे। पूरे साल में बुध तीन बार वक्री होंगे और तीन बार मार्गी होंगे।

कई राशियों का होगा परिवर्तन--

नए वर्ष में कई ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा।  शनि का राशि परिवर्तन 30 साल बाद धनु में होगा। शनि इससे पहले 18 दिसंबर 1987 को धनु राशि में  थे अगली बार 8 दिसंबर 2046 को  धनु राशि में आएंगे। बृहस्पति ग्रह वृश्चिक राशि से  धनु में 29 मार्च को प्रवेश करेंगे।  राहु का गोचर परिवर्तन कर्क से मिथुन राशि में 7 मार्च  को होगा और केतु धनु में प्रवेश करेंगे। शनि के 1 मई 2019 तक मार्गी रहने से एवं सीधी चाल रहने से कई राशियों को फायदा मिलेगा। गुरु का स्थान परिवर्तन होने से देश की स्थिति काफी मजबूत होगी। 

नए साल 2019 की शुरुआत सूर्यग्रहण से होगी ---

नए साल की शुरुआत सूर्य ग्रहण से हो रही है। 6 जनवरी को है पहला सूर्यग्रहण। दूसरा सूर्य ग्रहण 2 एवं 3 जुलाई के मध्य है। यह दोनों ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं पड़ेंगे। तीसरा सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को लगेगा जो भारत में दिखेगा। नए साल में पहला चंद्र ग्रहण 21 जनवरी को लगेगा। दूसरा चंद्र ग्रहण 16 जुलाई एवं 17 जुलाई मध्यांतर में लगेगा यह भारत में भी दिखेगा। ग्रहण हमेशा से मानव समुदाय के लिए उत्सुकता का विषय रहा है। भारत के अलावा पश्चिमी देशों में भी ग्रहण को लेकर अलग-अलग मान्यताएँ हैं। हिन्दू धर्म में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को लेकर कई तरह की पौराणिक कथा और मान्यताएँ हैं। जिसकी वजह से वैदिक ज्योतिष में ग्रहण एक महत्वपूर्ण घटना है। सूर्य और चंद्र ग्रहण के घटित होने से मानव जीवन, प्रकृति और वस्तुओं पर सीधा असर पड़ता है। 
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2019 में कुल 5 ग्रहण पड़ेंगे। इनमें 3 सूर्य ग्रहण होंगे और 2 बार चंद्रमा ग्रहण से पीड़ित होंगे। साल का पहला ग्रहण सूर्यग्रहण होगा और यह जनवरी के पहले सप्ताह में पड़ेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रहण एक खगोलीय घटना है। लेकिन ज्योतिष में इसका अपना महत्व होता है। ज्योतिषियों के अनुसार, सूर्य और चंद्रग्रहण का अलग-अलग राशियों पर अलग प्रभाव पड़ता है। साथ ही इसके अशुभ प्रभावों से बचने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ उपाय भी बताए गए हैं। आइए, जानते हैं कि साल 2019 में पड़नेवाले 5 ग्रहण किस-किस तारीख को प्रभावी होंगे।

साल में पड़नेवाले सूर्यग्रहण---

साल 2019 में कुल तीन सूर्य ग्रहण लगेंगे। इनमें से 2 ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देंगे। इस साल जनवरी महीने में ही दो ग्रहण हैं। इनमें एक सूर्य ग्रहण और दूसरा चंद्रग्रहण है।

साल का पहला सूर्यग्रहण--

साल का पहला ग्रहण सूर्यग्रहण है और जनवरी के पहले सप्ताह में ही यह सूर्य ग्रहण लगेगा। हालांकि यह आंशिक ग्रहण होगा और भारत में नहीं दिखाई देगा। जनवरी की 6 तारीख को यह ग्रहण प्रभावी होगा। भारतीय समय के हिसाब से सुबह 5 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और सुबह 9 बजकर 18 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

साल का दूसरा सूर्यग्रहण--

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 2 जुलाई को लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और यह ग्रहण भी भारत में नहीं दिखाई देगा। इस सूर्यग्रहण का समय रात 11 बजकर 31 मिनट से 2 बजकर 15 मिनट तक लगेगा।

तीसरा सूर्यग्रहण--

यह ग्रहण दिसंबर महीने की 26 तारीख को पड़ेगा। यह 8 बजकर 17 मिनट पर लगेगा और 10 बजकर 57 मिनट पर संपन्न होगा।

साल 2019 के चंद्रग्रहण--

साल 2019 में 2 चंद्रग्रहण लगेंगे और इनमें से एक चंद्रग्रहण भारत सहित अन्य एशियाई देशों में दिखाई देगा। साथ ही साल का पहला चंद्रग्रहण दिन के समय लगेगा।चंद्र ग्रहण भारतीय ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र ग्रहण के घटित होने से प्रकृति और मानव जीवन में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। ये परिवर्तन अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के हो सकते हैं। जिस तरह चंद्रमा के प्रभाव से समुद्र में ज्वार भाटा आता है, ठीक उसी प्रकार चंद्र ग्रहण की वजह से मानव समुदाय प्रभावित होता है। हर वर्ष पृथ्वी पर चंद्र ग्रहण घटित होते हैं। इस साल 2019 में दो चंद्र ग्रहण होंगे। 

जानिए दिन में होगा साल का पहला चंद्रग्रहण--

साल का दूसरा ग्रहण और पहला चंद्रग्रहण जनवरी महीने के तीसरे सप्ताह में पड़ेगा। यह ग्रहण 21 तारीख को प्रात: 9 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक लगेगा। यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा।

दूसरा चंद्रग्रहण---

16 जुलाई को दूसरा चंद्रग्रहण यह ग्रहण रात में 1 बजकर 31 मिनट से सुबह 4 बजकर 29 मिनट तक लगेगा। यह ग्रहण भारत सहित एशिया के अन्य देशों में भी दिखाई देगा। यह ग्रहण आंशिक चंद्रग्रहण है।

2019 में पहला चंद्र ग्रहण

दिनांक समय प्रकार दृश्यता
21 जनवरी 2019 08:07:34 से 13:07:03 बजे तक पूर्ण चंद्र ग्रहण मध्य प्रशांत महासागर, उत्तरी/दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका
सूचना: यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इसका धार्मिक महत्व और सूतक मान्य नहीं होगा। चंद्र ग्रहण पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में लगेगा, इसलिए इस राशि और नक्षत्र से संबंधित लोग इस चंद्र ग्रहण से प्रभावित होंगे।

2019 में दूसरा चंद्र ग्रहण--

दिनांक समय प्रकार दृश्यता
16-17 जुलाई 2019 25:32:35 से 28:29:50 बजे तक (भारतीय समयानुसार, 01:32:35 से 04:29:50 बजे तक) आंशिक चंद्रग्रहण भारत और अन्य एशियाई देश, दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया
सूचना: यह चंद्रग्रहण 16-17 जुलाई के मध्य घटित होगा और भारत में दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इस ग्रहण का सूतक मान्य होगा। यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगेगा और धनु व मकर दोनों राशि के जातकों पर इसका असर देखने को मिलेगा।

चंद्र ग्रहण का सूतक--

सूतक काल वह अशुभ समय है जो ग्रहण के घटित होने से पूर्व शुरू हो जाता है और ग्रहण समाप्ति पर स्नान के बाद खत्म होता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल को अच्छा समय नहीं माना जाता है इसलिए इस समय में कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है। इनमें मूर्ति पूजा, मूर्तियों का स्पर्श और भोजन बनाना व खाना वर्जित होता है। हालांकि वृद्धजनों, रोगियों और बच्चों पर ग्रहण का सूतक प्रभावी नहीं होता है। इसके अलावा जहां जिस देश या क्षेत्र में ग्रहण दिखाई देता है वहीं पर उसका सूतक मान्य होता है।

चंद्र ग्रहण ( 16-17 जुलाई) के सूतक का समय--

सूतक प्रारंभ 16 जुलाई को 15:55:13 बजे से
सूतक समाप्त 17 जुलाई 04:29:50 बजे।।

जानिए जन्म कुंडली में ग्रहण दोष कब बनता हैं--

वैदिक ज्योतिष में कालसर्प दोष, गण्डमूल दोष, पितृ दोष, मांगलिक और ग्रहण दोष समेत कई प्रकार के दोष बताए गए हैं। कुंडली में अशुभ दोष के निर्मित होने से व्यक्ति को जीवन में कुछ समस्या और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सूर्य और चंद्र ग्रहण के घटित होने से कभी-कभी कुछ लोगों की कुंडलियों में ग्रहण दोष भी उत्पन्न होता है। यह एक अशुभ दोष है जिसकी वजह से मनुष्य को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब किसी व्यक्ति की लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु या केतु में से कोई एक ग्रह स्थित हो, तो ग्रहण दोष बनता है। वहीं अगर सूर्य या चंद्रमा के भाव में राहु-केतु में से कोई एक ग्रह बैठा हो, तो यह भी ग्रहण दोष कहलाता है। ग्रहण दोष के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में परेशानियां टलने का नाम नहीं लेती हैं। इस दौरान नौकरी-व्यवसाय में समस्या, आर्थिक चुनौती और खर्च की अधिकता जैसी परेशानी बनी रहती है।

हण और मानव जीवन

आकाश में विचरण करने वाले ग्रह, नक्षत्र और सितारे हमेशा से मानव जीवन को प्रभावित करते आये हैं। वहीं मानव समुदाय के मन में भी आकाश में होने वाली घटनाओं को लेकर उत्सुकता रहती है। क्योंकि इन घटनाओं का सीधा असर हमारे जीवन पर देखने को मिलता है। हिन्दू ज्योतिष में कर्म की प्रधानता के साथ-साथ ग्रह गोचर और नक्षत्रों के प्रभाव को भी मनुष्य की भाग्य उन्नति के लिए जिम्मेदार माना जाता है। नवग्रह में सूर्य और चंद्रमा भी आते हैं इसलिए सूर्य और चंद्र ग्रहण का महत्व बढ़ जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कोई भी ग्रहण घटित होने से पहले ही अपना असर दिखना शुरू कर देता है और ग्रहण की समाप्ति के बाद भी इसका प्रभाव कई दिनों तक देखने को मिलता है। ग्रहण का प्रभाव न केवल मनुष्यों पर बल्कि जल, जीव और पर्यावरण के अन्य कारकों पर भी पड़ता है। यही वजह है कि ग्रहण मानव समुदाय को प्रभावित करता है।

यह हें ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा--

हिन्दू धर्म में ग्रहण को लेकर एक प्राचीन कथा सुनने को मिलती है। इसमें सूर्य और चंद्र ग्रहण के लिए राहु और केतु को जिम्मेदार बताया गया है। मान्यता है कि देवासुर संग्राम के समय देवता और दानवों ने जब समुद्र मंथन किया था, उस समय समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए अमृत को दानवों ने देवताओं से छीन लिया था। अमृत के सेवन से असुर जाति अमर हो जाती और यह समस्त जगत के लिए सही नहीं था, इसलिए असुरों को अमृत पीने से रोकने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नामक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया। मोहिनी ने अपनी सुंदरता और बातों से दानवों को बहला दिया और उनसे अमृत लेकर, उसे देवताओं में बांटने लगी। मोहिनी रूप धारण किये भगवान विष्णु की इस चाल को राहु नामक दैत्य समझ गया और वह देवता का रूप धारण कर अमृत पीने के लिए देवताओं की पंक्ति में जा बैठा। जैसे ही राहु ने अमृतपान किया, उसी समय सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया और उसका भेद खोल दिया। इसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से राहु की गर्दन को उसके धड़ से अलग कर दिया। हालांकि अमृत का सेवन कर लेने की वजह से उसकी मृत्यु नहीं हुई इसलिए उसका सिर राहु व धड़ केतु सौर मंडल में छायाग्रह के नाम से स्थापित हो गए। कहा जाता है कि राहु और केतु, सूर्य व चंद्रमा से इसी वजह से शत्रुता रखते हैं और इसी बैर की वजह से सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण के रूप में शापित करते हैं। कहते हैं कि ग्रहण के समय राहु और केतु, सूर्य व चंद्रमा को निगल जाते हैं।

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