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जानिए कौन से ग्रह बनाते हैं नौकरी के योग...

ज्योतिष से भविष्य संवारा जा सकता है, यह कोई अतिशयोक्ति नहीं वरन सत्य है। 

प्रिय मित्रों/पाठकों, नौकरी करवाना और नौकरी करना दो अलग अलग बातें है। जन्म कुन्डली में अगर शनि नीच का है तो नौकरी करवायेगा,और शनि अगर उच्च का है तो नौकरों से काम करवायेगा। तुला का शनि उच्च का होता है और मेष का शनि नीच का होता है। मेष राशि से जैसे जैसे शनि तुला राशि की तरफ़ बढता जाता है उच्चता की ओर अग्रसर होता जाता है,और तुला राशि से शनि जैसे जैसे आगे जाता है नीच की तरफ़ बढता जाता है,अपनी अपनी कुन्डली में देख कर पता किया जा सकता है कि शनि की स्थिति कहां पर है। और जिस स्थान पर शनि होता है उस स्थान के साथ शनि अपने से तीसरे स्थान पर,सातवें स्थान पर और दसवें स्थान पर अपना पूरा असर देता है। इसके साथ ही शनि पर राहु केतु मन्गल अगर असर दे रहे है तो शनि के अन्दर इन ग्रहों का भी असर शुरु हो जाता है,मतलब जैसे शनि नौकरी का मालिक है,और शनि वृष राशि का है,वृषभ राशि धन की राशि है और भौतिक सामान की राशि है,वृष राशि से अपनी खुद की पारिवारिक स्थिति का पता किया जाता है। 

जानिए नोकरी लगने के कुछ अन्य प्रमुख योग---
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य तथा चंद्र को राजा या प्रशासन से सम्बंध रखने वाले ग्रह के रूप में जाना जाता है। सूर्य या चंद्र का लग्न, धन, चतुर्थ तथा कर्म से सम्बंध या इनके मालिक के साथ सम्बंध सरकारी नौकरी की स्थिति दर्शाता है। सूर्य का प्रभाव चंद्र की अपेक्षा अधिक होता है। जन्म कुंडली में सूर्य तथा चंद्र की विभिन्न स्थिति इस प्रकार फलदायी होती है-

लग्न पर बैठे किसी ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव रखने वाला माना जाता है। लग्न पर यदि सूर्य या चंद्र स्थित हो तो व्यक्ति शाषण से जुडता है और अत्यधिक नाम कमाने वाला होता है।

चंद्र का दशम भाव पर दृष्टी या दशमेश के साथ युति सरकारी क्षेत्र में सफलता दर्शाता है। यधपि चंद्र चंचल तथा अस्थिर ग्रह है जिस कारण जातक को नौकरी मिलने में थोडी परेशानी आती है। ऐसे जातक नौकरी मिलने के बाद स्थान परिवर्तन या बदलाव के दौर से बार बार गुजरते है।

जब कुंडली में सूर्य या चन्द्रमा में से कोई एक मजबूत हो

जब कुंडली में पञ्च महापुरुष योग में से एक या ज्यादा योग हों

जब शनि की स्थिति मजबूत हो और शनि की साधे साती या ढैया चल रही हो

सूर्य धन स्थान पर स्थित हो तथा दशमेश को देखे तो व्यक्ति को सरकारी क्षेत्र में नौकरी मिलने के योग बनते है। ऐसे जातक खुफिया ऐजेंसी या गुप चुप तरीके से कार्य करने वाले होते है।

सूर्य तथा चंद्र की स्थिति दशमांश कुंडली के लग्न या दशम स्थान पर होने से व्यक्ति राज कार्यो में व्यस्त रहता है ऐसे जातको को बडा औहदा प्राप्त होता है।
यदि ग्रह अत्यधिक बली हो तब भी वें अपने क्षेत्र से सम्बन्धित सरकारी नौकरी दे सकते है। मंगल सैनिक, या उच्च अधिकारी, बुध बैंक या इंश्योरेंस, गुरु- शिक्षा सम्बंधी, शुक्र फाइनेंश सम्बंधी तो शनि अनेक विभागो में जोडने वाला प्रभाव रखता है। पैसा कमाने की इच्‍छा रखने वाले लोग करें इनका पूजन

यदि लग्न में शुभ ग्रहों की स्थिति और लग्न का स्वामी एक शुभ भाव में स्थापित हो तो वह अपनी दशा में जातक को उच्च पद तक पंहुचा सकता है, परन्तु शर्त यह है की उस गृह की दशा आपकी मध्यम उम्र में आनी चाहिए, यदि ये दशा आपके बुढ़ापे में आयगी को ज्यादा फायदा नहीं दे पायगी। जन्म कुंडली का पहला, दूसरा, चौथा, सातवा, नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी अपने कार्य काल में जातक को कामयाबी प्रदान करते है ।

कुछ ज्योतिषी छटवे भाव या इसके स्वामी को स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं मानते और यह बात सत्य भी है परन्तु और भी कई परिस्थियों के आधार पर ही हम ऐसा कह सकते है अन्यथा छठा भाव तथा इसका स्वामी गृह अपनी दशा में आपको एक उच्च पद का अधिकारी बना सकता है क्योकि छठा भाव और इसका स्वामी जातक के नौकरी पेशा से सम्बन्ध रखता है।

दसवा और ग्यारहवा भाव तथा इनके स्वामी ग्रहों का भी जातक की तरक्की से गहरा सम्बन्ध होता है क्योकि दसवा भाव हमारे रोजगार से और ग्यारहवा भाव हमारी आय से सम्बन्ध रखता है । अब यदि इन भावो में शुभ ग्रहों की स्थिति और इन भावो के स्वामी शुभ स्थिति में हो और इन ग्रहों की दशा आपकी मध्यम उम्र में आ जाये तो आप एक बेहतरीन जीवन शैली, नौकरी और उच्च पद के अधिकारी बन सकते है और एक अच्छी आय कमा सकते है ।

सूर्य चंद्र का चतुर्थ प्रभाव जातक को सरकारी क्षेत्र में नौकरी प्रदान करता है। इस स्थान पर बैठे ग्रह सप्तम दृष्टि से कर्म स्थान को देखते है।

हाथ में सूर्य की दोहरी रेखा हो

 हाथ में बृहस्पति के पर्वत पर क्रास हो
 सूर्य यदि दशम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को सरकारी कार्यो से अवश्य लाभ मिलता है। दशम स्थान कार्य का स्थान हैं। इस स्थान पर सूर्य का स्थित होना व्यक्ति को सरकारी क्षेत्रो में अवश्य लेकर जाता है। सूर्य दशम स्थान का कारक होता है जिस कारण इस भाव के फल मिलने के प्रबल संकेत मिलते है।

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