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जानिए उन कारणों को जिनके कारण आपको नोकरी का बुलावा नही आता हें

आपके पास बार बार नौकरी के बुलावे आते है और आप नौकरी के लिये चुने नहीं जाते है,तो इसमे इन कारणों का विचार आपको करना पडेगा:-

यह कि नौकरी की काबलियत आपके अन्दर है,अगर नहीं होती तो आपको बुलाया नहीं जाता।
यह कि नौकरी के लिये परीक्षा देने की योग्यता आपके अन्दर है,अगर नहीं होती तो आप सम्बन्धित नौकरी के लिये पास की जाने वाली परीक्षायें ही उत्तीर्ण नहीं कर पाते।

नौकरी के लिये तीन बातें बहुत जरूरी है,पहली वाणी,दूसरी खोजी नजर,और तीसरी जो नौकरी के बारे में इन्टरव्यू आदि ले रहा है उसकी मुखाकृति और हाव भाव से उसके द्वारा प्रकट किये जाने वाले विचारों को उसके पूंछने से पहले समझ जाना,और जब वह पूंछे तो उसके पूंछने के तुरत बाद ही उसका उत्तर दे दे।

वाणी के लिये बुध,खोजी नजर के लिये मन्गल और बात करने से पहले ही समझने के लिये चन्द्रमा।
नौकरी से मिलने वाले लाभ का घर चौथा भाव है,इस भाव के कारकों को समझना भी जरूरी है,चौथे भाव में अगर कोई खराब ग्रह है और नौकरी के भाव के मालिक का दुश्मन ग्रह है तो वह चाह कर भी नौकरी नहीं करने देगा,इसके लिये उसे चौथे भाव से हटाने की क्रिया पहले से ही करनी चाहिये। 

अगर जातक का मंगल चौथे भाव मे है और नौकरी के भाव का मालिक बुध है तो मन्गल के लिये शहद चार दिन लगातार बहते पानी में बहाना है,और अगर शनि चौथे भाव में है, और नौकरी के भाव का मालिक सूर्य है तो चार नारियल लगातार पानी मे बहाने होते है,इसी प्रकार से अन्य ग्रहों का उपाय किया जाता है।
जब कुण्डली में बृहस्पति की स्थिति काफी ज्यादा मजबूत हो

जब कुंडली में ग्रहण योग या गुरु गुरु चांडाल योग हो

जब कुंडली में शनि का सम्बन्ध धन स्थान से हो

ग्रह क्या नौकरी करवाने के लिये मजबूर करता है--

शनि कर्म का दाता है,और केतु कर्म को करवाने के लिये आदेश देता है,लेकिन बिना गुरु के केतु आदेश भी नही दे सकता है,गुरु भी तभी आदेश दे सकता है जब उसके पास सूर्य का बल है,और सूर्य का बल भी तभी काम करता है जब मंगल की शक्ति और उसके द्वारा की जाने वाली सुरक्षा उसके पास है,सुरक्षा को भी दिमाग से किया जाता है,अगर सही रूप से किसी सुरक्षा को नियोजित नही किया गया है तो कहीं से भी नुकसान हो सकता है,इसके लिये बुध का सहारा लेना पडता है,बुध भी तभी काम करता है जब शुक्र का दिखावा उसके पास होता है,बिना दिखावा के कुछ भी बेकार है,दिखावा भी नियोजित होना जरूरी है,बिना नियोजन के दिखावा भी बेकार है,जैसे कि जंगल के अन्दर बहुत बढिया महल बना दिया जाये तो कुछ ही लोग जानेंगे,उसमे बुध का प्रयोग करने के बाद मीडिया में जोड दिया जाये तो महल को देखने के लिये कितने ही लोग लालियत हो जावेंगे,अगर वहां पर मंगल का प्रयोग नही किया है तो लोग जायेंगे और बिना सुरक्षा के देखने के लिये जाने वाले लोग असुरक्षित रहेंगे और उनके द्वारा यह धारण दिमाग में पैदा हो जायेगी कि वहां जाकर कोई फ़ायदा नही है वहा तो सुरक्षा ही नही है। शुक्र वहां पर आराम के साधन देगा,शुक्र ही वहां आने जाने के साधन देगा,शुक्र से ही आने जाने के साधनों का विवेचन करना पडेगा,जैसे राहु शुक्र अगर हवा की राशि में है तो वाहन हवाई जहाज या हेलीकाप्टर होगा,शुक्र अगर शनि के साथ है,और जमीन की राशि में है तो रिक्से से या जानवरों के द्वारा खींचे जाने वाले अथवा घटिया वाहन की तरफ़ सूचित करेगा। 

ग्रह कभी भी नौकरी करवाने के लिये मजबूर नही करता है,नौकरी तो आलस से की जाती है,आलस के कारण कोई रिस्क नही लेना चाहता है,हर आदमी अपनी सुरक्षा से दालरोटी खाना चाहता है,और चाहता है कि वह जो कर रहा है उसके लिये एक नियत सुरक्षा होनी चाहिये,जैसे के आज के युवा सोचते है कि शिक्षा के बाद नौकरी मिल जावे और नौकरी करने के बाद वे अपने भविष्य को सुरक्षित बना लें,जिससे उनके लिये जो भी कमाई है वह निश्चित समय पर उनके पास आ जाये। 

यह एक गलत धारणा भी हो सकती और सही भी,जैसे कि हर किसी के अन्दर दिल मजबूत नही होता है,चन्द्रमा अगर त्रिक भाव मे है तो वह किसी प्रकार से रिस्क लेने में सिवाय घाटे के और कोई बात नही सोच पायेगा,किसी के लगनेश अगर नकारात्मक राशि में है तो वह केवल नकारात्मक विचार ही दिमाग में लायेगा। 

दरअसल, ज्योतिष भविष्य नहीं बताता, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों के अध्ययन से जातक के भविष्य में घटने वाले शुभ-अशुभ योग-संयोग के बारे में अवगत कराता है। इसके अनुरूप अगर सावधानी बरती जाए तो निश्चित ही फायदा होता है। यह लगभग वैसा ही है, जैसे मौसम की भविष्यवाणी करना। 

ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के प्रभाव प्रतिकूल या अनुकूल हो सकते है। ज्योतिषशाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री से जानिए की किस ग्रह की महादशा और अंतरदशा में जातक को नौकरी या रोजगार का अवसर प्राप्त हो सकता है। 
 
नौकरी के लिए उत्तम दशाएं - 
 
* लग्न के स्वामी की दशा और अंतरदशा में 
* नवमेश की दशा या अंतरदशा में 
* षष्ठेश की दशा या अंतरदशा में 
* प्रथम, षष्ठम, नवम और दशम भावों में स्थित ग्रहों की दशा या अंतरदशा में 
* राहु और केतु की दशा या अंतरदशा में
* दशमेश की दशा या अंतरदशा में
* द्वितीयेष और एकादशेष की दशा में 
 
नवम भाव भाग्य का भाव माना जाता है। भाग्य का बलवान होना अति आवश्यक है अतः नवमेश की दशा या अंतरदशा में भी नौकरी मिल सकती है। 
 
छठा भाव प्रतियोगिता का भाव माना जाता है। दशम भाव से नवम अर्थात भाग्य और नवम भाव से दशम अर्थात व्यवसाय का निर्देश करता है अतः षष्ठेश की दशा या अंतरदशा में भी नौकरी मिल सकती है। जो ग्रह प्रथम, षष्ठम, नवम और दशम में स्थित हों वे भी अपनी दशा या अंतरदशा में नौकरी दे सकते हैं। 

नौकरी के लिये शनि के उपाय -
नौकरी का मालिक शनि है लेकिन शनि की युति अगर छठे भाव के मालिक से है और दोनो मिलकर छठे भाव से अपना सम्बन्ध स्थापित किये है तो नौकरी के लिये फ़लदायी योग होगा,अगर किसी प्रकार से छठे भाव का मालिक अगर क्रूर ग्रह से युति किये है,अथवा राहु केतु या अन्य प्रकार से खराब जगह पर स्थापित है,अथवा नौकरी के भाव का मालिक धन स्थान या लाभ स्थान से सम्बन्ध नही रखता है तो नौकरी के लिये फ़लदायी समय नहीं होगा। 


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