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क्या ओर कैसे रहेंगें वर्ष 2019 के ग्रह गोचर ??

वर्ष 2019 व हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से विक्रम संवत 2076 (परिधावी संवत्सर) के राजा शनि हैं जबकि मंत्री सूर्य। दुर्गेश भी शनि हैं जबकि धनेश मंगल हैं। जबकि मंत्री सूर्य के होने से राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर वर्ष भर रहेगा। सूर्य के मंत्री होने से राजनीतिज्ञों का अमर्यादित व्यवहार रहेगा।  इस वर्ष पानी की कमी होने से लोग पलायन करेंगे।पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार 2019 की शुरुआत शुक्र और सूर्य के गोचर से होगी, जिसकी वजह से सुख और समृद्धि दोनों के मार्ग खुलेंगे।

भारतीय वैदिक ज्योतिष के मुताबिक 12 राशियां होती है। इन 12 राशियों पर पड़ने वाली ग्रह दशा के अनुसार ही किसी भी जातक का भविष्य या वर्तमान में चल रही उथल पुथल का पता लगाया जा सकता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मानी जाने वाली सभी 12 राशियों के स्वामी इन 9 ग्रहों में से ही होते हैं। सूर्य व चंद्रमा एक एक राशि तो मंगल, शुक्र, बुध, गुरु व शनि दो-दो राशियों के स्वामी माने जाते हैं। मेष व वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं तो वृषभ व तुला के स्वामी शुक्र। मिथुन व कन्या राशि का प्रतिनिधत्व बुध करते हैं तो कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं और सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं। धनु व मीन राशि गुरु की राशियां हैं तो मकर व कुंभ के स्वामी न्याय के देवता शनि माने जाते हैं। राहू-केतु को छाया ग्रह माना जाता है और किसी भी राशि के स्वामी ये नहीं माने जाते। जातक की राशि व राशि स्वामी की स्थिति के अनुसार ही जातक का व्यक्तित्व भी निर्धारित होता है। जैसे-जैसे जातक की कुंडली में ग्रहों की दशा में परिवर्तन आता है उसी प्रकार उनके सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव भी जातक पर पड़ते हैं। इसलिये ग्रहों की चाल, ग्रहों के गोचर या कहें ग्रहों के राशि परिवर्तन का व्यापक प्रभाव समस्त राशियों पर पड़ता है।

भारतीय  हिन्दू ज्योतिष में कर्म की प्रधानता के साथ-साथ ग्रह गोचर और नक्षत्रों के प्रभाव को भी मनुष्य की भाग्य उन्नति के लिए जिम्मेदार माना जाता है। नवग्रह में सूर्य और चंद्रमा भी आते हैं इसलिए सूर्य और चंद्र ग्रहण का महत्व बढ़ जाता है। 

इस वर्ष 2019 में दो चंद्र ग्रहण होंगे। चंद्र ग्रहण भारतीय ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र ग्रहण के घटित होने से प्रकृति और मानव जीवन में कई बदलाव देखने को मिलते हैं। ये परिवर्तन अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के हो सकते हैं। जिस तरह चंद्रमा के प्रभाव से समुद्र में ज्वार भाटा आता है, ठीक उसी प्रकार चंद्र ग्रहण की वजह से मानव समुदाय प्रभावित होता है।  

पूर्ण चंद्र ग्रहण 21 जनवरी 2019  08:07:34 से 13:07:03 बजे तक ।

यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इसका धार्मिक महत्व और सूतक मान्य नहीं होगा। 

चंद्र ग्रहण पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में लगेगा, इसलिए इस राशि और नक्षत्र से संबंधित लोग इस चंद्र ग्रहण से प्रभावित होंगे। 

चंद्र ग्रहण के बुरे असर को कम करने के लिए कर्क राशि और पुष्य नक्षत्र में जन्में लोगों को सावधानी बरतनी होगी। 

वर्ष 2019 के राजा हैं शनि, सूर्य मंत्री --
पंचागों के हवाले से बताया कि वर्ष 2019 व हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से विक्रम संवत 2076 (परिधावी संवत्सर) के राजा शनि हैं जबकि मंत्री सूर्य। दुर्गेश भी शनि हैं जबकि धनेश मंगल हैं।

मंगल का विशेष संयोग बना है 2019 में --
वर्ष 2019 में मंगलवार का विशेष संयोग बन रहा है। नए वर्ष की शुरुआत मंगलवार से हो रही है। वहीं नए वर्ष का समापन भी मंगलवार को होगा।

जैमिनी और केदार योग में हुआ नए वर्ष 2019 का आगमन--

नव वर्ष 2019 की शुरुआत जैमिनी और केदार योग में हो चुकी है। शुक्र व चंद्रमा  के एक साथ रहने से जैमिनी योग बना है जबकि सभी ग्रहों का चार स्थानों पर रहने से केदार योग का संयोग बन रहा है।

नए साल की शुरुआत सूर्यग्रहण से होगी --

 नए वर्ष की शुरुआत सूर्य ग्रहण से हो चुकी है दूसरा सूर्य ग्रहण 2 एवं 3 जुलाई के मध्य है। 

यह दोनों ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं पड़ेंगे। तीसरा सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को लगेगा जो भारत में दिखेगा। नए साल में पहला चंद्र ग्रहण 21 जनवरी को लगेगा। दूसरा चंद्र ग्रहण 16 जुलाई 2019 एवं 17 जुलाई 2019 मध्यांतर में लगेगा यह भारत में भी दिखेगा।

कैसा रहेगा नए वर्ष में 
सभी क्षेत्रों पर असर  --

ज्योतिषी दयानन्द शास्त्री के अनुसार नये वर्ष में केंद में सत्ता के भागीदारों के बीच वैचारिक मतभेद उभरेंगे। पर गुरु के सप्तम भाव में रहने से ये मतभेद सुलझ जाएंगे।  वहीं प्रोपर्टी ओर रियल इस्टेट के बिजनेस में काफी उछाल आयेगा। हमारी लोकतांत्रिक प्रणालियों में सुधार होगा। 

देश में मनोरंजन(टेलीविजन ओर सिनेमा) एवम तकनीकी के क्षेत्र में काफी प्रगति होगी। विश्व मे भारत की छवि और बेहतर होगी। हर क्षेत्र में भारत के लिए 2019 में बेहतर भविष्य दिखाई दे  रहा है।

नए वर्ष में कई ग्रह होंगे वक्री और मार्गी --

नए साल में  गुरु 10 अप्रैल को वक्री होंगे और  मार्गी होंगे 11 अगस्त  को। इसी तरह शनि 30 अप्रैल  को वक्री और मार्गी होंगे 18 सितंबर को l बुध 5 मार्च  को वक्री होंगे। पूरे वर्ष में बुध तीन बार वक्री होंगे और तीन बार मार्गी होंगे।


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