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भगवान विष्णु के पुजन एवं विभिन्न वस्तुओं के अर्पण का फल!!

नृसिंह स्वरुप भगवान विष्णु को निर्माल्य हटाकर जल से स्नान कराने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है तथा संपूर्ण तीर्थों के सेवन के फल प्राप्तकर , विमान पर आरूढ़ होकर स्वर्ग को चला जाता है और वहां से श्रीविष्णुधाम को प्राप्त होकर अक्षयकालपर्यंत आनंद का उपभोग करता है |

" भगवन नरसिंह ! आप यहाँ पधारें "- इस प्रकार अक्षत और पुष्पों के द्वारा यदि भगवान का आवाहन करें तो इतने से भी वह मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है | देवदेव नृसिंह को विधिपूर्वक आसन , पाद्य (पैर धोने के लिए जल ) , अर्घ्य (हाथ धोने के लिए जल ) , और आचमनीय (कुल्ला करने के लिए जल ) अर्पण करने से भी सब पापों से छुटकारा मिल जाता है |


भगवान नृसिंह को दूध और जल से स्नान कराकर मनुष्य सब पापों से मुक्त  हो विष्णुलोक  में प्रतिष्ठित होता है | जो एक बार भी भगवान को दही से स्नान कराता है , वह मनुष्य निर्मल एवं सुन्दर शरीर को धारण  करके सर्वरों में पूजित होता हुआ विष्णुलोक को जाता है | जो मनुष्य मधु से भगवान को नहलाता हुआ उनकी पूजा करता है , वह अग्निलोक में आनन्दोपभोग करके पुनः वैकुण्ठधाम में निवास करता है | जो स्नान कल में श्रीनरसिंह के विग्रह को शंख और नगारे का शब्द कराते हुए विशेष रूप से घी से स्नान कराता है , वह पुरुष पुराणी केंचुल को छोड़ने वाले सांप की भांति पाप-कंचुक को त्यागकर दिव्य विमान पर आरूढ़ होकर , विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है |


जो देवदेवेश्वर भगवान को भक्तिपूर्वक मंत्रपाठ करते हुए पंचगव्य से स्नान कराता है , उसका पुण्य अक्षय होता है | जो गेहूं के आंटे से देवदेवेश्वर भगवान को उबटन लगाकर गरम जल से उन्हें स्नान कराता है वह वरुणलोक को प्राप्त होता है | जो भगवान के पादपीठ (पैर रखने के पीढ़े , चौकी या चरणपादुका )- को भक्तिपूर्वक बिल्वपत्र से रगड़कर गरम जल से धोता है , वह सब पापों से मुक्त हो जाता है | कुश और पुष्प मिश्रित जल से भगवान विष्णु को स्नान कराने से मनुष्य ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है | रत्नयुक्त जल से नहलाने पर कुबेरलोक को प्राप्त होता है | जो कपूर और अगर मिश्रित जल से भगवान नृसिंह को नहलाता है , वह पहले इंद्रलोक में सुखोपभोग करके फिर विष्णुधाम में निवास करता है | जो पुरुषश्रेष्ठ तीर्थों के पवित्र जल से गोविन्द को भक्तिपूर्वक स्नान कराता है , वह आदित्यलोक को प्राप्त करके पुनः विष्णुलोक में पूजित होता है | जो भक्तिपूर्वक भगवान को युगल वस्त्र पहनाकर उनकी पूजा करता है , वह चंद्रलोक में सुखभोग करके पुनः विष्णु धाम में सम्मानित होता है |


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